कभी कभी मै सोंचता हूँ
कि.......
मै क्या हूँ?
कौन हूँ?
अगर हूँ भी , तो क्यों हूँ?
क्योंकि मै जो हूँ,
मुझे वह नही , कुछ और होना चाहिए था।
क्योंकि मुझे......
कुछ बनना था,
कुछ करना था,
सबसे अलग, कुछ नया,
अपने लिए, अपने समाज के लिए।
पर अफसोस!
मै......
वह न बन सका,
वह न कर सका,
फिर भी मै इसके लिए,
किसी और को दोष नही देना चाहता,
क्योंकि'आदमी'
स्वयं
अपने आप को बिगाड़ता है,
अपने आप को गढ़ता है।
By...kumar ajeet