मै खुद नही जानता
कि---
मै क्या हूँ?
अतीत हूँ या वर्तमान!
वर्तमान के बारे मे सोचता हूँ
तो----
अतीत,
कोरे कागज पर काली स्याही सा;
उभर कर
सामने आ जाता है।
मै खुद नहीं जानता
कि-----
मै क्या हूँ?
भूत हूँ या भविष्य?
भविष्य की कल्पना मात्र से ही;
रोंगटे खड़े हो जाते है,
क्यों कि----
भूत का भविष्य
सिर्फ
वर्तमान बन कर रह जाता है।